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रायपुर, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर प्रदेश में पारंपरिक खेती के साथ किसानों को अधिक मुनाफा देने वाली सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में एरोमेटिक कोण्डानार अभियान के तहत कोण्डागांव जिले के राजागांव में सबसे बड़े क्षेत्र में आम का बगीचा (अमरई) के विकास का प्रथम प्रयोग प्रदेश में किया जा रहा है। इसके तहत बागीचे में कुल एक हजार अल्फांजो प्रजाति के आम के पौधे रोपे गए हैं, जिसके तैयार हो जाने से लगभग 50 हजार क्विंटल आम का उत्पादन होगा। इससे प्रथम वर्ष से ही ग्रामीणों को कुल 25 एकड़ भूमि पर प्रति तिमाही छह लाख रूपए की नगद आमदनी प्राप्त होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा विगत 20 जून को एरोमेटिक कोण्डानार (सुगंधित कोण्डानार) अभियान का वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से शुभारंभ किया गया था। इस अभियान के तहत् जिले को एरोमा हब के रूप में विकसित करने के लिये 2000 एकड़ की वन, कृषि एवं निजी भूमियों पर सुगंधित फसलों का उत्पादन किया जाएगा। इसके साथ ही जिले में 20 करोड़ की लागत से संयंत्र स्थापित कर सुगंधित द्रव्यों का निर्माण किया जायेगा।

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को विधायक श्री मोहन मरकाम जनपद अध्यक्ष कोण्डागांव श्री शिवलाल मंडावी एवं कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने जिले के राजागांव में एरोमेटिक(सुगंधित) फसलों का रोपण किया। विधायक ने अल्फांसो आमों का रोपण करने के साथ लेमनग्रास, पचौली एवं पामारोजा के पौधे लगाए। अन्य जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर ने भी अल्फांसो आम, क्यारियों में लेमनग्रास, इंटरक्रापिंग में सुगंधित प्रजाति के घांस और लेमनग्रास, विटिवर, पामरोजा एवं पचौली का रोपण किया। यहां फेंसिंग के किनारे चारों ओर क्लोनल नीलगिरी एवं बांस के कुल 750 पौधों का भी रोपण किया गया है।

विधायक श्री मरकाम ने कहा कि जिले में रोजगार के साधनों और ग्रामीणों की आय को बढ़ाने के लिए एरोमेटिक कोण्डानार अभियान की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से किसान अधिक मुनाफा देने वाली सुगंधित फसलों की खेती कर दुगुना लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन फसलों से सुगंधित तेल निकालने के लिए जिले में प्लांट की स्थापना भी की जाएगी, जिससे किसानों को फसलों का उचित दाम मिलने के साथ ही रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कलेक्टर श्री मीणा ने कहा कि वर्तमान समय में सुगंधित तेलों की बहुत मांग है। सुगंधित फसलें 3 महीने में तैयार हो जाती हैं, जिससे फसलों के तैयार होते ही किसानों को उसका भुगतान तुरंत प्राप्त हो जाएगा। युवा किसान इन फसलों से जुड़कर अधिक से अधिक लाभ कमा सकते हैं। साथ ही प्लांट लग जाने से सुगंधित तेलों के निर्यात से कोण्डागांव को एक नई पहचान मिलेगी। इस अभियान के तहत ग्रामीणों को सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करने और उनके रोपण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे लेमन ग्रास, तुलसी, मुनगा, वेटीवर, अमाड़ी, पचौली एवं पामारोसा (खस) की फसलों की नर्सरी तैयार होगी। फसलों के रोपण के लिये वन परिक्षेत्र का चयन प्रारंभिक रूप से कर लिया गया है, साथ ही कृषि विभाग द्वारा इन फसलों की निजी एवं सामुदायिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सुगंधित प्रजाति के घांसों को खरीदने के लिए रायपुर की एक कंपनी से एमओयू. भी किया गया है।
 



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