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इस्लामाबाद ।  अफगानिस्तान पर तालिबानियों के काबिज होने के बाद दुनिया चिंतित है पर पाकिस्तान में उनकी जीत जश्न मनाया जा रहा है। इस्लामाबाद में एक मदरसे ने बकायदा इसके लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मदरसे की छत पर तालिबान का झंडा भी फहराया गया। इस्लामाबाद की लाल मस्जिद से जुड़े मदरसे के इन बच्चों ने तालिबान की तारीफ में गाने भी गाए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इन्हें देखकर लोगों ने कहा है कि इस तरह मासूम बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें शांति का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तानी पत्रकार रूहान अहमद ने ट्वीट की हैं, ‘इस्लामाबाद की लाल मस्जिद से जुड़े जामिया हफसा मदरसे के बच्चों ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का जश्न मनाते हुए ‘सलाम तालिबान’ गाना गाया।’ 
इन तस्वीरों को देखकर आम लोग तो हैरान हैं ही, अफगान मूल के लोग बेहद निराश हैं। अफगानिस्तान के पत्रकार और ऐक्टिविस्ट हबीब खान ने इस पर रिऐक्ट किया है, ‘पाकिस्तानी अभी अफगानिस्तान पर कब्जे का जश्न मनाते रहें। फिर अफगानी खुद को आजाद करा लेंगे और बाकी हमलावरों की तरह उन्हें बाहर निकाल देंगे। याद रखें पाकिस्तान टुकड़ों में टूट जाएगा।’ एक और शख्स ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तानी डीप स्टेट तालिबान को समर्थन से इनकार करता है लेकिन उसके ऐक्शन उसके शब्दों से ज्यादा तेज बोलते हैं।’ इस शख्स ने आरोप लगाया है कि पेशावर में अफगान लोगों ने अपने देश का झंडा फहराा तो उनके खिलाफ पुलिस रिपोर्ट हो गई लेकिन तालिबान का झंडा एक मदरसे में फहराया जाता है और कुछ नहीं होता। इससे पहले भी पाकिस्तान में तालिबान के समर्थन में रैलियां तक देखी गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी मौलाना भी तालिबान का समर्थन कर रहे हैं और इसके लिए तालिबान को डोनेशन का भी समर्थन कर रहे हैं। एजेंसी के मुताबिक क्वेटा में स्थानीय लोगों के मुताबिक तालिबान के समर्थन में गतिविधियां तेज हो गई हैं।
पाक के लिए तालिबानी राज का असर यह होगा कि आने वाले बरसों में पाकिस्तान में सुन्नी और वहाबी चरमपंथ  बढ़ेगा। लोग धार्मिक नेताओं के हाथ की कठपुतली बन जाएंगे। इतना ही नहीं, इससे पूरे पाकिस्तान पर नकारात्मक असर पड़ेगा। पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान गृहयुद्ध की आग में जल सकता है।
आतंकियों का समर्थन करने वाली पाकिस्तानी सरकार अनजाने मे अपने ही देश में कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रही है। यही कट्टरपंथी पाकिस्तान में तबाही भी मचा रहे हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार की आंख नहीं खुल रही। कुछ महीने पहले ही तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के समर्थकों ने पूरे देश में जमकर बवाल काटा था। जामिया हफ्सा पहले महिलाओं का एक मदरसा हुआ करता था। बाद में कट्टरपंथियों ने इसे बंद कर दिया। यह मदरसा इस्लामाबाद की विवादित लाल मस्जिद के पास स्थित है। लाल मस्जिद का मौलाना अब्दुल अजीज कई बार पाकिस्तानी सरकार को खुली चुनौती दे चुका है। इसी मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई करने के आरोप में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौबत यहां तक आ गई कि इस कट्टरपंथी समूह को प्रतिबंधित करने के बावजूद इमरान खान सरकार को इसके मुखिया को रिहा करना पड़ा था। इतना ही नहीं, खुद देश के आंतरिक मंत्री शेख रशीद ने कट्टरपंथियों के साथ बैठक कर उनकी मांगे मानी थी। यह वही संगठन है जिसने पाकिस्तान सरकार को फ्रांसीसी राजदूत के निष्कासन को लेकर अल्टीमेटम दिया था।
 



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