जापान के लोगों पर 20वीं सदी की शुरुआत में हावी हुई हिकिकोमोरी समस्या फिर उभर आई है। हिकिकोमोरी सामाजिक समस्या है, जो युवाओं से जुड़ी है। इससे पीड़ित लोग कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक समाज और परिवार से अलग-थलग अपने आप में गुम रहना पसंद करते हैं। इस बार लौटी इस समस्या ने हिंसक स्वरूप अख्तियार कर लिया है। खासतौर पर कोरोना महामारी के दौरान यह काफी बढ़ गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जापान में इससे ग्रसित लोगों की संख्या 10 से 15 लाख है, पर मनोवैज्ञानिकों का अनुमान है कि करीब 1 करोड़ यानी 8% आबादी इससे ग्रसित है। इससे पीड़ित लोग कुंठा के चलते आत्महत्या करने के बारे में सोचते हैं। साथ ही वह दूसरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। महिलाएं खासतौर पर ऐसे लोगों का निशाना बन रही हैं।
महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह कोरोना के दौरान काफी बढ़ा
वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता काजुनो हुतो कहती हैं कि जापानी समाज में महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह कोरोना के दौरान काफी बढ़ा है। कुछ पुरुषों को लगता है कि महिलाएं उनसे हीन हैं और यदि वे उनके अधीनस्थ नहीं हैं या खुश हैं तो उनसे यह बर्दाश्त नहीं होता है। जो महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खड़ी होती हैं वे भी ऐसे पुरुषों के निशाने पर होती हैं।
अगस्त की शुरुआत में एक 36 वर्षीय युवक ने ट्रेन में सवार लोगों पर चाकू से हमला कर दिया, जिसमें दस लोग जख्मी हुए लेकिन उसकी हिंसा का सबसे बड़ा शिकार 20 वर्षीय युवती हुई। उसके पीठ पर चाकू से 10 से अधिक वार किए गए। हमला करने वाले युवक ने पुलिस हिरासत में कहा कि वह पिछले 6 साल से खुश दिखने वाली महिलाओं को मारने की फिराक में था
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