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धर्म के साथ गणेश उत्सव इस बार 10 सितंबर से आरंभ हो रहा है। अपनी वेबसाइट के माध्यम से हम आपको इससे जुड़ी जानकारी देते आ रहे हैं। जैसे कि लगभग लोग जानते हैं कि गणेश उत्सव में भगवान गणेश जी की आराधना की जाती है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं बप्पा के एक प्राचीन मंदिर की। दरअसल हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु में स्थित उच्ची पिल्लयार मंदिर के बारे में। जो रॉक फोर्ट नामक पहाड़ी के सबसे ऊपर स्थित है, जिसे उच्ची पिल्लयार मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी एक मान्यता है जिसके अनुसार यहां रावण के भाई विभीषण ने एक बार भगवान गणेश पर वार किया था। आइए विस्तारपूर्वक जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा।

मंदिर से संबंधित कथाओं की मानें तो श्री राम ने विभिषण को भगवान विष्णु की मूर्ति लंका में विराजमान करने के लिए दी थी, परंतु साथ में शर्त यह रखी थी कि ले जाते वक्त इसे भूमि पर न रखें अन्यथा ये मूर्ति वहीं विराजमान हो जाएगी। दूसरी ओर देवता नहीं चाहते थे कि यह मूर्ति राक्षस राज्य में विराजमान हो तब उन्होंने गणेश जी को पाठ पढ़ा दिया। जिसके अनुसार गणेश जी एक बालक का वेशधारण करके विभीषण के पीछे हो लिए। बीच रास्ते में विभीषण जी ने सोचा क्यों न थोड़ा स्नान ध्यान कर लिया जाए। तब उन्होंने उस बालक को देखकर कहा कि ये मूर्ति संभालों इसे नीचे मत रखना मैं अभी नदी में स्नान करके आता हूं।

परंतु बालरूप में गणेश जी ने वह मूर्ति ले ली और उनके जाने के बाद भूमि पर रख दी और जाकर उक्त पहाड़ी पर छुप गए। जब वि‍भीषण को पता चला तो वह उग्र हो गए और उस बालक को ढूंढते हुए उसी पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गए और उन्होंने बालक को देखकर उसके सिर पर प्रहार किया। तब गणेश जी ने असली रूप में प्रकट हुए तो यह देखकर विभीषण पछताए और उन्होंने क्षमा मांगी तभी से इस चोटी पर गणेशजी विराजमान हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार बताया जाता है इसका संबंध 7वीं शताब्दी से बताया जाता है। इसके अतिरिक्त बता दें इस मंदिर में जाने के लिए 400 के लगभग सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।



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