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काबुल । अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल में पाकिस्‍तान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन के बाद टेंशन में आए तालिबान ने अचानक नई सरकार का ऐलान कर दिया है। इस अंतरिम सरकार का नेतृत्‍व मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद करेंगे। उन्‍हें प्रधानमंत्री बनाया गया है। अब तक प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे मुल्‍ला बरादर को मुल्‍ला हसन का डेप्‍युटी बनाया गया है। 
पाकिस्‍तान और आईएसआई के खास माने जाने वाले सिराजुद्दीन हक्‍कानी को गृहमंत्री बनाया गया है। हक्‍कानी पर अमेरिका ने 5 मिल‍ियन डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। यही नहीं इस कैबिनेट में 4 ऐसे आतंकी हैं जो अमेरिका की सबसे कुख्‍यात जेल ग्‍वांतनामो बे में कई साल जेल की सजा काट चुके हैं। बताया जाता है कि तालिबान की कैब‍िनेट में 99 फीसदी लोग पश्‍तून हैं और मात्र एक फीसदी प्रतिनिधित्‍व अल्‍पसंख्‍यकों को दिया गया है। 
मंत्रिमंडल में अमेरिका नीत गठबंधन और तत्कालीन अफगान सरकार के सहयोगियों के खिलाफ 20 साल तक चली जंग में दबदबा रखने वाली तालिबान की शीर्ष हस्तियों को शामिल किया गया है। 
मोहम्मद हसन अखुंद प्रधानमंत्री : तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के मंत्रिमंडल की घोषणा करते हुए मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। 'नई इस्लामिक सरकार' में संगठन की निर्णय लेने वाली शक्तिशाली इकाई ‘रहबरी शूरा’ या क्‍वेटा शूरा के प्रमुख मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद प्रधानमंत्री होंगे। वर्ष 1996-2001 की तालिबानी सरकार के दौरान अखुंद विदेश मंत्री और डेप्‍युटी पीएम रह चुके हैं। वह तालिबान के संस्‍थापक मुल्‍ला उमर के बेहद करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। ताल‍िबान के अंदर उन्‍हें बहुत सम्‍मान से देखा जाता है। अखुंद संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों की लिस्‍ट में शामिल हैं।
अब्‍दुल गनी बरादर : तालिबान के सह संस्‍थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर नई कैबिनेट में उप प्रधानमंत्री होंगे। उनके साथ अब्‍दुल सलाम हनफी को भी डेप्‍युटी पीएम बनाया गया है। अमेरिका के साथ शांति वार्ता में तालिबान का नेतृत्व किया था और उस समझौते पर साइन किए थे जिसके चलते अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से वापस गए। 'बरादर' लड़ाई के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला एक नाम है, जो मुल्ला अब्दुल गनी को तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर से मिला था। तालिबान के पिछले शासन में मुल्ला उप रक्षा मंत्री थे। मुल्ला उमर के सबसे भरोसेमंद कमांडरों में से एक अब्दुल गनी बरादर को 2010 में दक्षिणी पाकिस्तानी शहर कराची में सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया था, लेकिन बाद में तालिबान के साथ डील होने के बाद पाकिस्तानी सरकार ने 2018 में उन्हें रिहा कर दिया था।
सिराजुद्दीन हक्‍कानी, गृहमंत्री : पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हक्‍कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्‍कानी को गृहमंत्री बनाया गया है। अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल हक्‍कानी पर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया गया है। हक्‍कानी का अफगानिस्‍तान के ड्रग्‍स के अवैध व्‍यापार पर दबदबा है। वर्ष 2018 में अपने पिता जलालुद्दीन हक्‍कानी की मौत के बाद हक्‍कानी नेटवर्क का सरगना बना था। उसके अलकायदा से भी गहरे संबंध हैं। अफगानिस्‍तान में भारतीयों पर हमले में भी यह शामिल रहा है। अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की वेबसाइट के अनुसार, 2008 में अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या के प्रयास की साजिश में भी वह कथित रूप से शामिल था।
अमीर खान मुत्तकी, विदेश मंत्री : तालिबान की अंतरिम सरकार में मुल्ला अमीर खान मुत्तकी नए विदेश मंत्री होंगे जबकि भारत में पढ़े शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकजई को उप विदेश मंत्री बनाया गया है। अमीर खान पिछली तालिबान सरकार में संस्‍कृति, सूचना और शिक्षा मंत्री थे। बाद में उन्‍हें कतर भेज दिया गया। दोहा में उन्‍होंने अमेरिका के साथ बातचीत की और अंतत: समझौते पर हस्‍ताक्षर हुआ। उन्‍हें हाल ही में तालिबान में उदारवादी आवाज घोषित किया गया था। उन्‍होंने पंजशीर के विद्रोहियों से बातचीत की अपील की थी। मुल्‍ला अमीर के सहयोगी शेर मोहम्‍मद अब्‍बास बनाए गए हैं। भारत में पढ़े शेर मोहम्‍मद का पाकिस्‍तान की सेना के साथ गहरे संबंध हैं।
मुल्‍ला याकूब, रक्षा मंत्री : तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे मुल्ला याकूब रक्षामंत्री बनाए गए हैं। वह वर्ष 2015 में अपने पिता की जगह लेना चाहते थे, लेकिन उनका यह प्रयास विफल हो गया। वर्ष 2020 में उन्‍हें तालिबान मिल‍िट्री कमिशन का प्रमुख बनाया गया। 30 साल की उम्र में उसे तालिबान के एक प्रमुख धड़े की जिम्‍मेदारी दी गई थी। 
मुल्ला हिदायतुल्ला बदरी को वित्त मंत्री : मुल्ला हादायतुल्ला बदरी को वित्तमंत्री बनाया गया है और कारी फसिहुद्दीन बदख्शानी नए सेना प्रमुख होंगे। तालिबान प्रवक्‍ता जबीउल्‍ला मुजाहिद ने कहा मंत्रिमंडल का गठन पूरा नहीं हुआ है और यह केवल कार्यवाहक मंत्रिमंडल है। हम देश के अन्य हिस्सों से भी लोगों को इसमें शामिल करने का प्रयास करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के शीर्ष नेता मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा ने खुद अफगानिस्तान के नए प्रमुख के रूप में मुल्ला हसन का नाम प्रस्तावित किया।
 



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