
अफगानिस्तान में तालिबान के विरोध का आखिरी किला रहे जा रहे पंजशीर में लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विद्रोही लड़ाकों को मात देते हुए तालिबान ने कब्जा जमा लिया है और गवर्नर हाउस पर अपना झंडा फहरा दिया है। इससे पहले काबुल पर कब्जा जमाने के बाद भी तालिबान ने अफगानिस्तान का झंडा उतार दिया था और अपना फहराया था। हालांकि इस बीच विद्रोहियों का कहना है कि वे अब भी हारे नहीं है और लड़ाई जारी है। खबर है कि अफगानिस्ता के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह किसी गुप्त स्थान पर चले गए हैं और वहीं से बागियों का नेतृत्व कर रहे हैं।
अमरुल्लाह सालेह के एक करीबी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने लोगों को अकेला नहीं छोड़ा है। वह पूरी तरह से सेफ हैं और विद्रोहियों का नेतृत्व कर रहे हैं। इस बीच खबर यह भी है कि तालिबान से सीजफायर का प्रस्ताव नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के नेता अहमद मसूद ने रखा था। लेकिन तालिबान ने संघर्ष विराम करने से इनकार किया है। अहमद मसूद ने रविवार शाम को मजहबी नेताओं की अपील के बाद संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे तालिबान ने खारिज कर दिया। तालिबान का कहना है कि वह इस लड़ाई को जारी रखेगा और अब उसके लड़ाके बाहर नहीं निकलेंगे।
अलजजीरा से बातचीत में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि अब हमें अहमद मसूद से कोई बात नहीं करनी है। तालिबान नेता ने कहा कि मसूद ने हमारे शांति प्रस्ताव को पहले खारिज कर दिया था। अब हमें कोई बात नहीं करनी। इससे पहले रविवार को अहमद मसूद ने तालिबान से अपील करते हुए कहा था कि हम सैद्धांतिक तौर पर बातचीत करके मौजूदा समस्याओं के हल के पक्ष में हैं। उम्मीद है कि धार्मिक नेताओं की अपील पर तालिबान की ओर से कोई सकारात्मक जवाब मिलेगा। उम्मीद है कि तालिबान इस समस्या का कोई व्यवहारिक हल निकालने की कोशिश करेगा।
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