
नई दिल्ली । परियोजनाओं का तय समयसीमा में पूरा नहीं होना अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। इस लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी चिंतित हैं, इसके लिए बड़े एक्शन प्लान की रूपरेखा तय की है। 25 अगस्त 2021 को पीएम के निर्देश पर समीक्षा बैठक बुलाई गई।इसमें पीएम मोदी ने विभिन्न अदालतों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की वजह से विलंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सूची मांगी है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा संबंधित मंत्रालयों के साथ होने वाले व्यापक चर्चाओं का नेतृत्व करने वाले है। चार मंत्रालयों को कैबिनेट सचिव की निगरानी में अभ्यास में सहयोग करने करने के लिए कहा गया है।साथ ही परियोजनाओं में देरी की वजह से हो रहे सरकारी खजाने के नुकसान की सूची भी तैयार करने को कहा गया है।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है, कि अभ्यास पूरा होने के बाद सरकार क्या करने की योजना बना रही है। लेकिन यह साफ है कि पीएम द्वारा शीर्ष-स्तरीय हस्तक्षेप और साथ में कानून मंत्रालय की भागीदारी से इसके संकेत मिलते हैं, बुनियादी ढांचे को पूरा करने में उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलेगी।रिपोर्ट में बताया गया है कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, रेलवे और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों को कानून और न्याय मंत्रालय के परामर्श से भूमि अधिग्रहण, वन या अन्य मंजूरी आदि से संबंधित माननीय न्यायालयों, एनजीटी आदि के निर्णयों की पहचान करनी चाहिए। जिनके कारण बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं में देरी हो रही है।
पीएम की बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि कैबिनेट सचिव को इस तरह की कवायद की निगरानी करनी चाहिए। इस तरह के अदालती फैसलों और आदेशों के कारण विलंबित परियोजनाओं की सूची, जिसमें राजकोष को हुए नुकसान भी शामिल है, कैबिनेट सचिव द्वारा तैयार और संकलित की जा सकती है।
25 अगस्त को पीएम को प्रतिष्ठित वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में देरी के बारे में बताया गया था, और उन्होंने परियोजना को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात सरकारों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। देरी होने की वजह से पीएम नाराज थे और उन्होंने 25 अगस्त को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को 15 सितंबर, 2021 तक दिल्ली के शहरी विस्तार मार्ग पर काम शुरू करने के लिए भी कहा। मंत्रालय को 'मिशन मोड' में काम शुरू करना चाहिए और 15 अगस्त, 2023 से पहले परियोजना को पूरा करना चाहिए।
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