देहरादून । उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपने सियासी समीकरण ठीक करने में जुट गई है।पीएम मोदी के कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम की वापसी पर बीजेपी सरकार मंथन कर रही है।माना जा रहा है कि सीएम पुष्कर धामी सरकार साधु-संतों की नाराजगी को दूर करने के लिए देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम की वापसी का कदम उठा सकते हैं।
धामी सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के मामले में जिस तरह प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाया है, उसी तरह प्रदेश सरकार भी देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम को लेकर अडिग नहीं है।उन्होंने कहा कि अगर लगेगा कि ये कानून चारधाम, मठ-मंदिरों व आमजन के हित में नहीं है,तब फिर सरकार कानून को वापस लेने पर विचार कर सकती है।
बता दें कि त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल में चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम अस्तित्व में आया था।इसके तहत देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड गठित किया गया, जिसके दायरे में चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री व इनसे जुड़े 43 मंदिरों सहित कुल 51 मंदिर शामिल किए हैं। उत्तराखंड चारधाम के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी अधिनियम व बोर्ड का निरंतर विरोध कर रहे है।उनका कहना है कि यह अधिनियम उनके हितों पर कुठाराघात है। हालांकि, तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन को देखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की।यह समिति अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और अब उसकी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
वहीं,पीएम मोदी की 5 नवंबर की केदारनाथ यात्रा से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने केदारनाथ में आंदोलित तीर्थ पुरोहितों से बातचीत की थी।तब सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही इस संबंध में निर्णय ले लिया जाएगा।साथ ही प्रधानमंत्री के केदारनाथ आगमन पर तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था।ज्ञापन में अधिनियम और बोर्ड को वापस लेने का आग्रह किया गया।
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