कोण्डागांव : कहते हैं सफलता का कोई कद, रंग रुप, शरीर का आकार नहीं होता। अपनी इच्छाशक्ति से मनुष्य सफलता एवं स्वाभिमान के रास्तों से होते हुए मिशाल कायम कर जाता है। ऐसी मिशाले लोगों के लिए वर्षों तक प्रेरणा का कार्य करती है। ऐसी ही कुछ कहानी फरसगांव विकासखण्ड के ग्राम पंचायत आलोर में रहने वाली सोमारी मरकाम की है। सोमारी अनुवांशिक बीमारी के कारण जन्म से ही उनका कद छोटा था परंतु कुछ करने का जुनून हमेशा से ही उनके दिमाग में था। छोटे कद के कारण उनके परिजनों एवं उन्हें अपने भविष्य की चिंता सदैव लगी रहती थी। ऐसे में उन्होंने 2016 में बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद कई स्थानों पर नौकरी प्राप्त करने हेतु प्रयास किया परंतु उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सोमारी बताती हैं कि इस समय वे बहुत निराश हो चुकी थी ऐसे में उन्हें नजदीकी ग्राम की रोजगार सहायक गौरी देहारी से मिलने का मौका मिला। जहां गौरी द्वारा उन्हें महिला मेट के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। जहां वे खुद रोजगार की तलाश में भटक रहीं थीं उन्हें अन्य अपने जैसे लोगों को रोजगार दिलाकर उनके जीवन में परिवर्तन लाने का एक अवसर दिखा।
कहते हैं सफलता का कोई कद, रंग रुप, शरीर का आकार नहीं होता।
जिसपर सोमारी द्वारा महिला समूह के साथ जुड़ने के साथ महिला मेट के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। जहां उन्हें रोजगार सहायक गौरी देहारी, बीसी सखी सावित्री कोर्राम का सहयोग मिला। महिला मेट के रूप में कर्मठता से कार्य करते हुए रोज सुबह 5.00 बजे से कार्यस्थल पर पहुंच कर गोदी की चुने द्वारा मार्किंग कर खुदाई कार्य करवाया जाता है साथ ही पंजी का संधारण कर जॉबकार्ड अद्यतन करने एवं मोबाईल एप्प द्वारा मस्टर रोल ऑनलाईन भरने का कार्य किया जाता है। सोमारी कहती हैं कि उन्हें अपना कार्य बहुत पसंद है वे प्रतिदिन लोगों से मिलकर लोगों को मनरेगा अंतर्गत रोजगार हेतु प्रेरित करती हैं। मनरेगा के द्वारा गांव के हर परिवार को रोजगार के अधिकार से अवगत कराकर सभी की सहायता का प्रयास कर रही हैं। कोरोना काल में कई लोगों के रोजगार छिन गये थे ऐसे में लोगों को मनरेगा के द्वारा रोजगार दिलाकर उन्हें आर्थिक सहायता दिलाना मुख्य उद्देश्य रहा है। सोमारी वर्तमान में डबरी निर्माण कार्य में कार्यरत हैं। एक माह में 622 मानव दिवस उनके द्वारा सृजित किये गए हैं।
ग्राम पंचायत आलोर में सावित्री कोर्राम, गौरी देहारी एवं सोमारी को ग्रामीणों द्वारा तीन देवियों की संज्ञा दी जाती है। इन तीनों के प्रयास से गांव में मनरेगा के अंतर्गत नवीन कार्यों के चयन, उनके क्रियान्वयन के साथ समय पर भुगतान प्राप्त होने से लोगों में शासकीय योजनाओं के प्रति विश्वास बढ़ा है। इन सभी कार्यों में भुगतान के प्रति गांव वालों में सदैव चिंता बनी रहती थी। ऐसे में सावित्री एवं सोमारी के प्रयासों से सभी मनरेगा कार्यों का भुगतान कार्यस्थल पर नगद रूप में किया जा रहा है। जिससे लोगों का मनरेगा कार्यों के प्रति रूझान बढ़ा है। अब लोग स्वयं कार्यों के लिए घरों से बाहर आ रहे हैं। पूरे गांव में इन्हें सावित्री को बैंक दीदी एवं गौरी को रोजगार दीदी के रूप में जाना जाता है। सोमारी ने भी गांव में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। सोमारी अपने तीन फूट पांच इंच (3श्5ष् फुट) के छोटे कद के बावजूद स्वाभिमान से जीवन जीने की राह दिखा रही हैं। सोमारी सहित गौरी एवं सावित्री सभी महिलाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुकी हैं। तीनों ने अपने कार्यों से अपनी एक अलग पहचान के साथ स्वाभिमान एवं सफलता के नये मुकाम भी तय कर रहीं हैं। फरसगांव विकासखण्ड में वर्तमान में 158 महिलाओं द्वारा मेट हेतु पंजीयन कराया गया है। जिसमें से 110 महिलाएं बिहान स्व-सहायता समूहों के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
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