जयपुर । राजस्थान के पुष्कर में लगने वाली पशु मेले की ख्याति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है और इस मेले में देशी विदेशी पर्यटकों का अच्छा खासा आना जाना रहता है मगर कोरोना काल के बाद लगने वाले पुष्कर पशु मेले में विदेशी पर्यटकों की कमी देखी जा रही है जिसके चलते मेले का माहौल थोड़ा फीका नजर आ रहा है।
पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटक की कमी के चलते इसके रंग अब अधूरे से लगने लगे है पुष्कर मेले में हर वर्ष महीनों पहले होटल और ट्रैवल पैकेज संबंधित बुकिंग 4 महीनों पहले शुरू हो जाती थी कोरोना महामारी के चलते 2 वर्षों से विदेशी पर्यटकों के भारत आगमन को लेकर सख्त नियम लागू किए हुए हैं, जिसके चलते पुष्कर का पर्यटन व्यवसाय बीते 2 वर्षों से बदतर आर्थिक हालात से जूझ रहा है इस वर्ष कोरोना महामारी के मामलों में कमी और वैक्सीनेशन की अनिवार्यता के बावजूद भी विदेशी पर्यटकों को टूरिस्ट वीजा उपलब्ध नहीं हो पा रहा, जिसके चलते बिजनेस वीजा पर भारत घूमने आए चंद विदेशी पर्यटक ही पुष्कर के धोरों की सतरंगी संस्कृति से रूबरू हो पा रहे हैं.फ्रांस मूल के पर्यटक बताते हैं कि पुष्कर मेले का अविस्मरणीय जादुई अनुभव है. पुष्कर मेले में आकर हम रोमांचित अनुभव कर रहे हैं. टूरिस्ट वीजा नहीं मिल पाने के कारण कई विदेशी पर्यटक पुष्कर मेले में नहीं आ पाए. हमें उम्मीद है कि नवंबर के अंत तक भारत के लिए टूरिस्ट वीजा उपलब्ध हो पाएंगे। अंतराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेला देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए आजीवका का मुख्य साधन है दरअसल, पुष्कर की आर्थिक जरूरत की पूर्ति अंतराष्ट्र्रीय पुष्कर मेले से होती है. ऐसे में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी की गई गाइड लाइन और टूरिस्ट वीजा नहीं दिए जाने के कारण पर्यटन व्यवसाय पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है, जिसके चलते न पर्यटकों का सीजन चला, न विश्व प्रसिद्ध होली महोत्सव का आयोजन हुआ।
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